उम्र से तलाश है जिसकी मुझे वोह एक सड़क नहीं मिलती
चौराहों पर निकली जाती है यूँ ज़िन्दगी दिन ब दिन गिनते
चौराहों की शक्ल तो मिलती है पर वो एक सड़क नहीं मिलती
मिलता है बस एक रास्ता सा अगले चौराहे तक हर दिन
मगर किसी भी चौराहे पर बस वोह एक सड़क नहीं मिलती
मालूम होता है हर मोड़ सही, उन वक़्त के कोरे पन्नों पर
बनती है जब किताब उनकी तो उस में वो सड़क नहीं मिलती
लोगों का जमघट है हर एक चौराहे पर रटे तोतों की तरह
सब कुछ है उनकी ऊंची आवाज़ में पर वो सड़क नहीं मिलती
ज़ेहन में बचा नहीं हाल जिनके खामोश हो गए ख्याल जिनके
सुकून का बहाना ढूंढते हैं चौराहे पर जिन्हें सड़क नहीं मिलती
न कदमों में है अब दम उनके, न निगाह में बची है वोह नज़र
चौराहों पर ही बस जाते हैं वो जिन्हें कोई सड़क नहीं मिलती
वोह सड़क सिर्फ सड़क नहीं, मेरे होने का है सबब ए कमल
बस चलता जाऊँगा मैं जब तक मुझे मेरी सड़क नहीं मिलती
नहीं दूंगा मुक़दर मैं चौराहे पर दफ़न होने को सुकून कि कब्र में